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जम्‍मू-कश्‍मीर में गुपकार फैसले के खिलाफ में उतरें देश के पूर्व नौकरशाह, सैन्‍य अधिकारी और शिक्षाविद
November 5, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

नई दिल्ली, देश के पूर्व नौकरशाह, सैन्य अधिकारियों, शिक्षाविदों समेत अन्य लोगों ने जम्मू कश्मीर में गुपकर फैसले पर विरोध दर्ज कराया है। कंर्सनेड ग्रुप ऑफ इंडिया के बैनर तले 267 लोगों ने समर्थन करते हुए हस्ताक्षर भी किए हैं। इस पत्र के माध्यम से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देश के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया गया है।

लेफ्टिनेंट जनरल वीके चतुर्वेदी की ओर से एक बयान जारी कर कहा गया है कि जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री महबूबा मुफ्ती ने राष्ट्रवाद की सभी सीमाओं को पार कर लिया है। देश में रहते हुए वो देशद्रोह की बात कर रही है। वो देश के नियम कानून का उल्लंघन कर रही है। इस तरह की हरकत के लिए वो खुद ही उत्तरदायी है। उन्होंने कुछ दिन पहले कहा था कि वह कश्मीर में भारत का राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराएंगी जब तक उनको कश्मीर का झंडा नहीं दिया जाता है वो दोनों झंडा एक साथ फहराना चाहती हैं। यह राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और प्रतिष्ठा का सीधा अपमान है जो राष्ट्रीय संप्रभुता और अखंडता का सबसे पवित्र प्रतीक है।इस बयान में ये भी बताया गया है कि ये संगठन सेवानिवृत्त अखिल भारतीय सिविल सेवा, पुलिस अधिकारियों, सेना, वायु सेना और नौसेना के दिग्गजों, शिक्षाविदों, पेशेवरों और अन्य लोगों का है। ये संगठन भारत के चिंतित नागरिकों का एक समूह हैं। बयान में कहा गया है कि हमारा समूह जम्मू कश्मीर में गुपकर फैसले के खिलाफ है जिसमें एक ही देश में दो तरह के झंडे फहराने की बात करते है। इस तरह से गुपकर में शामिल नेताओं ने हमारे देश और उसके संविधान से अलग होकर अलगाववाद को बढ़ावा देने की कोशिश करने का काम किया है। ऐसा करते समय, वे उन देशों की भाषा बोलते हैं जो भारत से शत्रुता रखते हैं। इस तरह के नेता ही भारत के विरोधी देशों से यहां की शांति को खत्म करने में सहयोग लेने में संकोच नहीं करते हैं। इन्हीं के सहयोग से देश की शांति प्रभावित होती है।