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जानें -क्‍या है भारत सरकार का नई मंजिल प्रोग्राम, जिसका 50 हजार से अधिक महिलाओ ने उठाया लाभ
August 30, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

जिनेवा, नई मंजिल भारत सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय द्वारा चलाया जाने वाला एक ऐसा प्रोग्राम है, जिसकी बदौलत कई महिलाओं ने अपने जीवन में नया सवेरा किया है। इस प्रोग्राम के तहत उन महिलाओं को शिक्षा पूरी करने का अवसर प्रदान किया जाता है जो किसी कारण से इसको पूरा नहीं कर पाती हैं। कि व कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनने में मदद की जा रही है जो किन्हीं कारणों से शिक्षा पूरी नहीं कर पाती हैं। इसके अलावा इस कार्यक्रम के तहत महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद की जाती है।

इस कार्यक्रम के तहत इसका पहला बैच 2017 में अपना प्रशिक्षण पूरा कर सामने आया था। अब तक इस कार्यक्रम के तहत 50 हजार से अधिक अल्पसंख्यक महिलाओं को आत्‍मनिर्भर बनाया गया है। विश्व बैंक ने इस कार्यक्रम के लिए 5 करोड़ डॉलर का ऋण दिया है। ये कार्यक्रम देश के 26 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा है। भारत सरकार का ये कार्यक्रम महिलाओं को सशक्‍त बनाने की एक अनूठी पहल भी है। संयुक्‍त राष्‍ट्र की खबर में विश्व बैंक की वरिष्ठ शिक्षा विशेषज्ञ मार्गेराइट क्लार्क और शिक्षा सलाहकार प्रद्युम्न भट्टाचार्जी के लिखे ब्लॉग का हवाला देते हुए उन महिलाओं की कहानी को साझा किया गया है जिन्‍होंने इससे अपने जीवन को संवारा हैसमीरा उन महिलाओं में से एक है जिसने इस प्रोग्राम का हिस्‍सा बन इससे काफी कुछ सीखा और फिर अपने जीवन को संवारा। समीरा के मां-बाप काफी गरीब थे। 14 वर्ष की उम्र में ही समीरा ने पढ़ाई लिखाई छोड़ दी थी। इसके बाद उसकी शादी कर दी गई और वो अपने पति के घर केरल के मलप्‍पुरम जिले में चली गई। उसका पति मछुआरे समुदाय से ताल्‍लुक रखता है। शादी के बाद समीरा भी दूसरी महिलाओं की ही तरह घर के काम काम में उलझती चली गई। परिवार के लिए खाना बनाना, घर की साफ-सफाई करना बस यहीं तक उसकी जिंदगी सिमट कर रह गई थी। फिर एक दिन उनके यहां पर भारत सरकार के कार्यक्रम ‘नई मंजिल- नव क्षितिज’ नामक कार्यक्रम ने दस्तक दी।

समीरा ने इस कार्यक्रम में हिस्‍सा लेने के लिए जब अपने पति से बात की तो उसने भी इसकी इजाजत दे दी। यह पल उसके लिए बेहद खास था। उसने इस कार्यक्रम के तहत टेलरिंग का काम सीखा और करीब डेढ़ वर्ष के बाद तीन अन्‍य महिलाओं के साथ मिलकर अपनी एक टेलरिंग की दुकान शुरू की। इस दुकान का नाम उसने बिस्मिल टेलरिंग रखा। कुछ समय बाद उसका काम भी अच्‍छा चल निकला। वहां पर रहने वाले मछुआरों के समुदाय से उसके पास काफी काम आता था। समीरा के मुताबिक लोगों को उनका काम पसंद आया और इस तरह से उनकी कमाई में भी बढ़ोतरी होने लगी। हालांकि कोविड-19 की शुरुआत होने के बाद राज्‍य में लगाए गए लॉकडाउन से उसके काम पर भी विप‍रीत असर पड़ा और काम मिलना बंद हो गया। इससे सब तरफ निराशा छा गई थी।