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जामिया हिंसा मामले में हाईकोर्ट ने पूछा कि दिल्ली पुलिस के खिलाफ एफआईआर हुई
September 20, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

जामिया हिंसा मामले में हाईकोर्ट ने पूछा कि दिल्ली पुलिस के खिलाफ एफआईआर हुई

दिल्ली।जामिया हिंसा से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में अमन लेखी ने दिल्ली पुलिस की तरफ से बहस पूरी कर ली है. दिल्ली दंगों और जामिया हिंसा से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट 1 अक्टूबर को करेगा. जामिया हिंसा मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट में शुक्रवार को हुई सुनवाई में दिल्ली पुलिस की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने बहस की. अमन लेखी ने कहा कि चूंकि ये मामला रूटीन का है, इसलिए इस केस का ट्रांसफर नहीं हो सकता. उन्होंने कहा, एक-एक मामले पर इन्क्वायरी चल रही है, जहां भी बात हुई है कि पुलिस ने ज्यादा फोर्स लगाई है उस पर जांच हो रही है, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी उस दिन पुलिस कार्रवाई का समर्थन किया है।
दिल्ली हाईकोर्ट जामिया में हुई हिंसा के मामले में याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है जिसमें स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।इन याचिकाओं में पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए हैं। सुनवाई के दौरान शुक्रवार को हाईकोर्ट ने अमन लेखी से कहा कि आपको हमें संतुष्ट करना पड़ेगा कि पुलिस के जवानों के खिलाफ क्या-क्या इन्क्वायरी चल रही है, क्या कोई एफआईआर भी दर्ज हुई है।
अमन लेखी ने सीआरपीसी का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस ने जो कुछ किया, भीड़ को हटाने के लिए किया और कानून के दायरे में किया. पुलिस ने कई चेतावनी भी दी. वहां वार्निंग के बावजूद भीड़ हटी नहीं, बल्कि पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचने लगी और कानून को अपने हाथ में लेने का प्रयास किया गया। प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए एंटी रायट इक्विपमेंट को वहां लगाया गया था।पुलिस पर पत्थरबाजी की गई और डीटीसी बस को आग के हवाले कर दिया गया. लेखी ने कहा, लॉ एंड आर्डर को बनाए रखने के लिए पुलिस जामिया यूनिवर्सिटी में दाखिल हुई। सीआरपीसी की धारा 129 के तहत पुलिस की कार्रवाई बिल्कुल सही है. जबकि पुलिस के खिलाफ कार्रवाई या एक्शन लेने के लिए सीआरपीसी की धारा 132 के मुताबिक केंद्र सरकार से इजाजत लेनी पड़ती है. याचिकाकर्ता ने खुद केंद्र सरकार से पुलिस के खिलाफ मामला चलाने के लिए कोई इजाजत नहीं मांगी. तो किस बात की एफआईआर।  
अपनी बहस को आगे बढ़ाते हुए अमन लेखी ने कोर्ट से कहा कि मजिस्ट्रेट भी पुलिस अफसर के खिलाफ मामला नहीं चला सकता जब तक केंद्र सरकार की स्वीकृति न हो, खासकर इस तरह के मामलों में. कोर्ट अब इस मामले की जांच किसी और को ट्रांसफर भी नहीं कर सकता क्योंकि चार्जशीट दायर हो चुकी है. जिन लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर हुई है उनमें से किसी एक ने भी अभी तक इस कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया है. एनएचआरसी ने भी मुआवजे की बात कही नहीं कही है बल्कि पुलिस की कार्रवाई को सही बताया है.
इस पर कोर्ट ने कहा कि बहस ये नहीं है कि दिल्ली पुलिस यूनिवर्सिटी में दाखिल नहीं हो सकती? बहस है कि आपने यूनिवर्सिटी प्रशासन से अंदर दाखिल होने की इजाजत क्यों नहीं ली? इस पर अमन लेखी ने कहा कि इस तरह के हालातों में इजाजत की कोई जरूरत ही नहीं है. जामिया यूनिवर्सिटी भारत में है और भारत का कानून वहां लागू होता है. जामिया हिंसा से जुड़े याचिकाओं पर पुलिस की तरफ से बहस पूरी होने के बाद शुक्रवार को कोर्ट ने दिल्ली दंगों से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई 1 अक्टूबर तक के लिए टाल दी है।