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गोलीकांड में हिस्ट्रीशीटर व उसके बेटे समेत 7 पर रिपोर्ट   
August 18, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश


 
बांगरमऊ/उन्नाव । प्रधानी चुनाव की रंजिश में खेत गए युवक को गोली मारकर घायल करने की वारदात में पुलिस ने पीड़ित के भाई की तहरीर पर हमलावर हिस्ट्रीशीटर उसके बेटे व तीन भाइयों समेत सात लोगों पर रिपोर्ट दर्ज की है। गिरफ्तारी के लिए पुलिस की तीन टीमें दबिश दे रही हैं।
फतेहपुर चौरासी थाना क्षेत्र के पपरिया गांव के मजरा परशुरमपुर गांव निवासी रज्जन यादव रविवार शाम को बांगरमऊ के कुशालपुरवा के मजरा फरीदपुर कट्टर गांव स्थित अपने खेत देखने गया था। जहां पहले से मौजूद उसके ही गांव के कुछ लोगों ने घेराबंदी पर पहले उसे जमकर पीटा फिर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी। पीठ और सिर में गोली लगने से रज्जन लहूलुहान हो गया। हालत गंभीर होने पर सीएचसी से जिला अस्पताल फिर कानपुर रेफर कर दिया गया था। इलाज के दौरान उसकी हालत में सुधार है। घायल रज्जन के भाई रामप्रकाश की तहरीर पर पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर ओमप्रकाश उर्फ लल्लू उसके बेटे धीरेंद्र प्रताप, तीन भाइयों में जयनारायण, सोनेलाल, धीरेंद्र प्रताप व गांव के अजय सिंह, शैलेंद्र व राकेश के खिलाफ बलवा, हत्या की कोशिश व गालीगलौज की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की है। कोतवाल भावनाथ चौधरी ने बताया कि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली जाएगी।
घायल का भाई बोला, प्रधानी चुनाव की आरोपी मानते है रंजिश
गोलीकांड में घायल रज्जन यादव के भाई रामप्रकाश के अनुसार वर्ष 2017 के प्रधानी चुनाव में उसके भाई रज्जन यादव ने ग्राम भुठिया निवासी प्रमोद द्विवेदी का समर्थन किया था। प्रमोद द्विवेदी 17 मतों से विपक्षी हिस्ट्रीशीटर ओमप्रकाश उर्फ लल्लू के बेटे धीरेंद्र प्रताप से चुनाव हार गए थे। चुनाव में प्रमोद का समर्थन करने से ओमप्रकाश रज्जन से रंजिश मानने लगा। चुनाव संपन्न होने के कुछ माह बाद ही हिस्ट्रीशीटर ओमप्रकाश व रज्जन के बीच गोलियां चली थीं। जिसमें लल्लू पक्ष से 6 लोग गोली लगने से घायल हो गए थे। दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ थाना फतेहपुर चौरासी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दोनों पक्षों को पुलिस ने जेल भेजा था। रज्जन यादव की 2 वर्ष बाद जमानत हो गई थी। तीन साल पहले हुए गोलीकांड में एक माह तक पीएसी ने किया था कैंप ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2017 में रज्जन व ओमप्रकाश के बीच हुए गोलीकांड के बाद लगभग एक माह तक पीएसी ने गांव में कैंप किया था। पुलिस ने दोनों पक्षों के सहयोगियों पर भी नकेल कसी थी। इसके बाद से जब भी रज्जन ने ओमप्रकाश के विरुद्ध जब स्थानीय या लखनऊ के पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई के लिए शिकायती पत्र दिया, स्थानीय पुलिस ने ओमप्रकाश पक्ष को शांतिप्रिय ढंग से गांव में रहने की रिपोर्ट लगाकर भेज दी। भाई का आरोप है कि घटना से कुछ दिन पहले लखनऊ के उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की गई थी पर स्थानीय पुलिस ने इस बार भी ओमप्रकाश के पक्ष में रिपोर्ट लगाकर भेज दी थी। जिस पर उसने घटना को फिर से अंजाम दे दिया।