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दिल्ली मेट्रो के पास नहीं लोन चुकाने के पैसे, पहली बार हुआ है ऐसा 
July 24, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • राष्ट्रीय

नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी से जुड़े लॉकडाउन ने दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) को खस्ताहाल कर दिया है। दिल्ली मेट्रो का परिचालन 22 मार्च से बंद है और इस दौरान उसे करीब 1200 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। हालत यह है कि पहली बार दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) अपने दो दशक के इतिहास में कर्ज के भुगतान की अदायगी की स्थिति में नहीं और उस पर डिफॉल्ट का खतरा मंडरा रहा है। डीएमआरसी ने मेट्रो के निर्माण के लिए जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) से 35,198 करोड़ रुपये के सॉफ्ट लोन ले रखा है और इस साल वह इसकी किस्त चुकाने की स्थिति में नहीं है।
डीएमआरसी को वित्त वर्ष 2020-21 में 1242.8 करोड़ रुपये की किस्त देनी है। उसने अभी तक मात्र 79.2 करोड़ रुपये ही चुकाए हैं। डीएमआरसी ने उसे इस मुसीबत से निकालने का लिए केंद्र सरकार से गुहार लगाई है। उसने इस किस्त के भुगतान को अगले साल तक के लिए टालने का अनुरोध किया है। दिल्ली मेट्रो 22 मार्च से बंद है और पिछले चार महीनों में उसे कोई पैसेंजर रेवेन्यू नहीं मिला है। कोविड-19 के प्रकोप के कारण बाकी सेक्टर भी प्रभावित हुए हैं जिससे मेट्रो की बाकी स्रोतों से आय पर भी असर पड़ा है। इतना ही नहीं डीएमआरसी को 389 किमी लंबे नेटवर्क और 285 स्टेशनों को चालू हालत में रखने के लिए खर्च करना पड़ रहा है। साथ ही 10,000 कर्मचारियों की सैलरी भी देनी पड़ रही है। उसे रोज 10 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

30 साल के लिए सॉफ्ट लोन
एक सूत्र ने कहा कि डीएमआरसी और कुछ समय तक बिना रेवेन्यू के रह सकती है लेकिन उसका सबसे बड़ा सिरदर्द लोन की अदायगी है। उसे JICA से 1.2 फीसदी से 2.3 फीसदी की आसान ब्याज दर पर 30 साल के लिए लोन मिला है जिसमें 10 साल का मोरेटोरियम शामिल है। इस लोन का भुगतान डीएमआरसी को करना है लेकिन यह लोन केंद्र सरकार ने दिल्ली मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए लिया है। डीएमआरसी को इसकी पहली किस्त 1997 में मिली थी और इसके एक साल बाद पहले फेज का काम शुरू हुआ था। मेट्रो ने 2007 में रिपेमेंट शुरू किया था। अब तक वह 3337 करोड़ रुपये चुका चुकी है।