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देश में 18 राज्यों ने नई शिक्षा नीति पर काम करना किया शुरू, कांग्रेस से नहीं आया सुझाव
August 13, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

नई दिल्ली, जेएनएन। लंबी प्रतीक्षा के बाद आई नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में कोई रोड़ा न अटके इसके लिए चौतरफा प्रयास शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां कुलपतियों और उच्च शिक्षण संस्थाओं के प्रमुखों से बात की है। वहीं भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के साथ भाजपा और राजग सहयोगी शासित राज्यों के साथ चर्चा कर यह सुनिश्चित किया कि क्रियान्वयन तत्काल शुरू हो। बैठक में शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को भी शामिल किया गया ताकि सभी शंकाओं का समाधान वहीं हो। 

बताते हैं कि सभी राज्यों ने समय से इसके क्रियान्वयन का भरोसा दिया है। यूं तो नई शिक्षा नीति इस मायने में अभूतपूर्व रही कि इसका विरोध लगभग नगण्य है। वामदलों को छोड़ दिया जाए तो कांग्रेस ने असहमति जरूर जताई लेकिन वह व्यापक नहीं है। बल्कि कांग्रेस की एक राष्ट्रीय प्रवक्ता वने इसका व्यकितगत रूप से स्वागत किया था।
कांग्रेस की ओर से सीमित चर्चा का आरोप लगाया गया था। जबकि शिक्षा मंत्रालय के अनुसार खुद निशंक ने ड्राफ्ट से पहले ढाई लाख ग्राम समितियों, लगभग 25 करोड़ छात्र छात्राओं और अभिभावकों,एक हजार विश्वविद्यालयों, 45 हजार डिग्री कालेज के प्रधानाचार्यों, एनजीओ आदि से चर्चा की थी। सभी सांसदों से भी चर्चा की गई थी और सुझाव मांगे गए थे। 

बताते हैं कि जितने भी सुझाव आए उसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी या फिर कांग्रेस के पूर्व शिक्षा मंत्रियों की ओर से कोई सुझाव नहीं आए थे। ऐसे में यूं तो सरकार मानकर चल रही है कि विपक्षीदल शासित राज्यों में भी परेशानी नहीं होगी। लेकिन पहले भाजपा और राजग शासित राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में यह सुनिश्चत करना चाहती है कि वहां कोई अड़चन या दुविधा न रहे।इसी बाबत कुल डेढ़ दर्जन राज्यों की प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षामंत्रियों के साथ नड्डा ने खुद बात की। निशंक अपने अधिकारियों समेत इस बैठक में मौजूद थे और सभी सवालों का जवाब दिया।