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देसी खिलौनों से विश्व को लुभाने की तैयारी कर रहा भारत, हुनर हाट मेले में रहेगी स्वदेशी की धूम
September 20, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

नई दिल्‍ली,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खुद स्‍वदेशी खिलौनों में रुचि लिए जाने और ‘एक भारत, श्रेष्‍ठ भारत’ के तहत खिलौनों के जरिए भारतीय संस्‍कृति और संस्‍कारों को बढावा देने के आह्वान के बाद देश में खिलौना उद्योग के फिर से फलने-फूलने के दिन आते दिख रहे हैं। इस कड़ी में सरदार वल्‍लभ भाई पटेल, छत्रपति शिवाजी, रानी लक्ष्‍मीबाई, परमवीर चक्र विजेता योद्धाओं आदि के अलावा भारतीय संस्‍कृति से जुड़े मूल्‍यों, योग आदि पर आधारित खिलौनों को प्रोत्‍साहित करने के लिए केंद्रीय उद्योग व व्‍यापार संवर्धन विभाग नौ विभिन्‍न मंत्रालयों के साथ मिलकर काम कर रहा है। आइए इस संदर्भ में देसी खिलौनों के संसार पर डालते हैं एक नजर...

आगामी अक्टूबर महीने की शुरुआत से देश के विभिन्न राज्यों में शुरू हो रहे हुनर हाट मेले में लोगों को लुभाएंगे स्वदेशी खिलौने। इसके जरिए दस्तकारों एवं खिलौना कारीगरों को भी बड़े बाजार तक पहुंचने का मौका मिलेगा। मेले में 30 प्रतिशत से अधिक स्टॉल स्वदेशी खिलौनों के कारीगरों के लिए आरक्षित होंगे। भारत के घरेलू खिलौना उद्योग का समृद्धशाली इतिहास रहा है। उत्तर प्रदेश, बंगाल, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों में सदियों से दस्तकार, शिल्पी अपने हाथों से आकर्षक खिलौने बनाते आ रहे हैं। बदलते वक्‍त के साथ वे तकनीक का प्रयोग भी कर रहे हैं। सुखद यह भी है कि अब नए स्टार्टअप खिलौना निर्माण से जुड़ रहे हैं। उन्होंने खिलौनों में नवाचार कर स्वयं को बाजार में स्थापित किया है।एक दौर था जब इतने इलेक्ट्रॉनिक गैजेट या आधुनिक खिलौने नहीं थे। बच्चे फर्श पर चॉक से लकीरें खींचकर, डायस की जगह इमली के बीज से बोर्ड गेम खेल लिया करते थे। वे गुल्ली-डंडा, लट्टू, पचीसी और न जाने क्या-क्या खेलते था। उद्देश्य एक होता था, दो से तीन घंटे घर से बाहर मैदान या खुले आसमान के नीचे खेलना। मजे करना। लेकिन आज के दौर में ज्यादातर बच्चे वर्चुअल दुनिया में अकेले ही सारे गेम्स खेल रहे हैं। उनके पास खिलौनों के सीमित विकल्प रह गए हैं। सुरक्षा एवं अन्य कारणों से अभिभावक भी उन्हें कुछेक बड़े ब्रांड्स के खिलौने देना ही उचित समझते हैं। लड़कियों के लिए किचन सेट, बार्बी डॉल और लड़कों के लिए गन या मोटरबाइक तय मान लिया गया है, जबकि खिलौनों से बच्चों का ईक्यू (इमोशनल कनेक्ट) यानी भावनात्‍मक रिश्‍ता मजबूत होता है।