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देर से आना जल्दी जाना की अधिकारियों-कर्मचारियों की आदत ने विकास कार्यों का किया बंटाधार
September 1, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

 

फतेहपुर। जिले के विकास में जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के साथ-साथ गैर जनपद से आवागमन करने वाले अधिकारी कर्मचारी भी एक बड़ा कारण है।अधिकारी कर्मचारी "देर से आने और जल्दी जाने की अपनी आदत" को सुधार नहीं पा रहे हैं। लाख प्रयास करने के बावजूद जिले के आला अफसर अधिकारियों कर्मचारियों की इस मनमानी पर लगाम नहीं लगा पाए और इसी का नतीजा रहा कि जिम्मेदार कभी भी अपने दफ्तरों में ना तो समय से पहुंचे और ना ही निर्धारित समय तक अपनी कुर्सी पर रुक। गैर जनपद से आवागमन करने के चलते अपने मनमाफिक ट्रेन व बस से आने के पहले ही जाने वाले साधन का समय देख कर आते हैं। आज हालात ये हैं कि दूरदराज से आने वाले लोगों को अपने कामों के लिए भटकना पड़ता है।जिम्मेदार अपनी कुर्सी पर नजर ही नहीं आते। इन पर कभी भी कड़ी कार्रवाई नहीं हुई जिसके चलते इनके हौसले बुलंद हैं और अधिकारी कर्मचारी अपने मुख्यालयों में कभी रुकते ही नहीं। नतीजतन विकासखंड स्तर के सरकारी आवास तो खंडहर का रूप धारण करते चले जा रहे हैं।
शासन-प्रशासन के अधिकारी इस बात पर जोर देते रहे हैं कि निर्धारित समय पर अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्यालयों में बैठे लेकिन काम मंशा के विपरीत ही हुआ। आकस्मिक होने वाले कभी कभार के निरीक्षण में अगर अधिकारी कर्मचारी अनुपस्थित मिले तो उनके पास लाख बहाने रहे और जवाब तलबी के समय उन्हें बड़े अफसरों के सामने पेश किया गया। कभी बैंक का काम तो कभी मीटिंग तो कभी क्षेत्र भ्रमण की बात कर अपनी कारगुजारी पर यह अफसर और कर्मचारी पर्दा डालते रहे हैं। जिम्मेदारों ने कभी इनकी क्रास चेकिंग कराने की जहमत नहीं उठाई जिनसे इनके हौसले बढ़े रहे सरकारें बदलती रही अफसर बदलते रहे लेकिन इनकी मनमानी नहीं बदली। आज भी कोरोना के बहाने अधिकारी कर्मचारी दफ्तरों में ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। कोई "वर्क फ्राम होम" तो कोई "हॉटस्पॉट" होने की बात कर घरों में मौज मार रहे हैं,अपने काम किए जा रहे हैं और मौज मस्ती जारी है लेकिन जिस जवाबदेही के लिए उन्हें सरकार मोटी तनख्वाह देती है उस उत्तरदायित्व के प्रति उनकी बेपरवाही इस कदर है कि आम जनता तक की फिक्र करना इन्होंने छोड़ दिया है। नतीजतन दफ्तरों में अधिकारी कर्मचारी नहीं मिल रहे हैं। विकासखंड स्तरों पर तो और भी बुरे हालात हैं। स्वास्थ्य,शिक्षा,बिजली, विकास, पीडब्ल्यूडी, परिवहन आदि विभागों के दर्जनों अधिकारी कर्मचारी गैर जनपदों से आवागमन कर रहे हैं। कार्यालय निर्धारित समय से नहीं पहुंचते और वापस जाने की जल्दी में रोजमर्रा के काम भी नहीं निपटाते जिससे उनके पटलों पर फाइलों का अंबार लगा रहता है।ये अधिकारियों की निगाह से बचने के लिए कोई ना कोई बहाना ढूंढ लेते हैं।
जब यह हालात हों तो आम जनता जिन पर भरोसा करके दूर-दराज के गांवों से विकासखंड,तहसील व जिला मुख्यालय के दफ्तरों तक आती है! आने के बाद उन्हें पता चलता है कि संबंधित अधिकारी कर्मचारी तो आया ही नहीं और उन्हें मायूस होकर घर वापस जाना पड़ता है।जिम्मेदारों की इस बेपरवाही पर जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी को ठोस कदम उठाना होगा।आवासों की सूची ले रुकने की क्रास चेकिंग करानी होगी।इनकी जवाबदेही तय की जाए और इन पर कड़ी कार्रवाई की जाए जिससे विकास की रफ्तार को आगे बढ़ाया जा सके। *आम जनता के प्रति जवाबदेह अधिकारियों कर्मचारियों पर जिलाधिकारी को सख्त होना होगा तभी इनकी गैर जिम्मेदाराना आदतों पर सुधार किया जा सकेगा।