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डेढ़ लाख तक बढ़ाएं UP के कोविड अस्पतालों में बेड : योगी
June 19, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि टेस्टिंग व्यवस्था आईसीएमआर के प्रोटोकॉल के तहत स्थापित की जाए। साथ ही उन्होंने कोविड अस्पतालों में बेड की संख्या डेढ़ लाख तक बढ़ाने का निर्देश दिया है। यह जानकारी गुरुवार को यहां के लोकभवन में कोरोना वायरस के संबंध में किए गए प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अपर मुख्य सचिव (गृह एवं सूचना) अवनीश कुमार अवस्थी ने दी।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि कोविड अस्पतालों में बेड की संख्या डेढ़ लाख तक की जाए। इसके अलावा ऐसे टेस्टिंग लैब स्थापित किए जाएं, जो न केवल कोरोना बल्कि अन्य वायरस संबंधित बीमारियों की जांच के लिए भी उपयोग किए जा सकें। प्रदेश में लगभग 8 बड़े नए टेस्टिंग लैब स्थापित किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने टेस्टिंग की क्षमता को और आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि टेस्टिंग के मामले में प्रदेश को पूरे देश में प्रथम स्थान पर लाना हमारा लक्ष्य है।

अवस्थी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि टेस्टिंग प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए। सैंपल लेने के बाद जल्द से जल्द उसका परिणाम जारी किया जाए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि अगले कुछ दिनों में 25 हजार टेस्ट करने की क्षमता को अर्जित करना है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने कहा है कि बेड की व्यवस्था मानकों के अनुरूप की जाए और इसकी निरंतर मॉनिटरिंग भी की जाए। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि बाल संरक्षण गृह, महिला संरक्षण गृह और वृद्धाश्रम जैसे स्थानों में व्यापक रूप से कोरोना की जांच की जाए। वहां संक्रमण न फैले। उन्होंने जिलाधिकारियों को स्वयं इसकी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।

अवस्थी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि प्रदेश के चौराहों सहित सभी प्रमुख स्थानों पर कोरोना को लेकर सावधानियां बरतने के लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि सावधानी बरतना ही कोरोना का इलाज है।

अपर मुख्य सचिव (गृह) ने बताया कि मुख्यमंत्री ने पशु चिकित्सा अधिकारियों को गो-आश्रय स्थलों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी पशु आश्रय स्थल पर यदि जानवर की संदिग्ध हालात में मौत होती है, बीमारी फैलती है या प्रबंधन से संबंधित कोई कमी उजागर होती है, तो ऐसी स्थिति में संबंधित जिले के पशु चिकित्सा अधिकारी व्यक्तिगत रूप से इसके लिए जिम्मेदार माने जाएंगे।