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चीन ने उइगर के बाद अब उत्सुल मुस्लिमों पर भी शुरू किया अत्याचार
September 29, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

चीन ने उइगर के बाद अब उत्सुल मुस्लिमों पर भी शुरू किया अत्याचार

(न्यूज़)।चीन में धार्मिक आजादी नाम की कोई चीज नहीं. वहां के उइगर मुसलमानों का मुद्दा लगातार सुर्खियों में है कि कैसे शिनजियांग प्रांत में लाखों मुस्लिम डिटेंशन कैंपों में बंद हैं. अब हेनान प्रांत के उत्सुल मुसलमान भी कम्युनिस्ट पार्टी के निशाने पर हैं. कट्टरता खत्म करने के नाम पर उनके रीति-रिवाज बदले जा रहे हैं. लगभग 10000 की आबादी वाली इस माइनोरिटी के पारंपरिक पहनावे पर पाबंदी के साथ ही साथ अब उनपर सख्त निगरानी भी रखी जा रही है. जानिए, क्या है ये समुदाय और चीन किस तरह की सख्ती बरत रहा है.
कुछ दिनों पहले चीन के सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हुई थी. उसमें हिजाब पहनी लड़कियों को भारी पुलिसबल ने घेर रखा था. ये लड़कियां उत्सुल समुदाय से थीं. इसके बाद ही ये आदेश आया कि उत्सुल मुसलमान संप्रदाय के बच्चे स्कूल या कॉलेजों में पारंपरिक कपड़े पहनकर नहीं जा सकते. इधर पहले से ही बहुत कम आबादी वाले और अपनी पहचान के लिए जूझ रहे इस समुदाय को हिजाब के उतारे जाने पर एतराज है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट में उत्सुल संप्रदाय के एक व्यक्ति ने कहा कि हिजाब हमारी संस्कृति का हिस्सा है और उसे उतारना कपड़े उतारने जैसा है.
केवल पोशाक ही नहीं, बल्कि धार्मिक स्थलों के निर्माण पर भी कई नए नियम बने हैं. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ने इसपर एक रिपोर्ट तैयार की है. इसके तहत ऐसी मस्जिदों के बनाए जाने पर रोक है, जिसकी वास्तुकला में कोई भी अरबी पैटर्न हो. यहां तक कि अगर किसी उत्सुल मुसलमान ने अपनी दुकान के सामने कोई अरबी शब्द लिखा हुआ हो तो उसे वो भी हटाना होगा. अगर चीनी भाषा में भी कोई दुकानदार हलाल या इस्लामिक शब्द लिखता है तो उसपर भी कार्रवाई होगी.
साथ ही साथ इस समुदाय पर सख्त निगरानी शुरू हो चुकी है. इसके तहत समुदाय की हर मस्जिद कमेटी का एक सदस्य गैर-मुसलमान और कम्युनिस्ट पार्टी का सदस्य होगा. मैनेजमेंट में इस सदस्य की बात अहम होगी. ये सारे रोकटोक और दबाव ठीक वैसे ही हैं, जैसे आज से कुछ साल पहले शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लमानों के ऊपर बनने शुरू हुए थे. पाबंदियां बढ़ते-बढ़ते इतनी आगे चली गईं कि अब लाखों उइगर मुस्लिम वहां री-एजुकेशन कैंप के नाम पर डिटेंशन कैंपों में डाले जा चुके हैं।