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चीन में उत्पन्न हुआ बड़ा खाद्यान्न संकट, दूसरे देशों में खेती के लिए ढूंढ रहा जमीन
October 26, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

चीन में उत्पन्न हुआ बड़ा खाद्यान्न संकट, दूसरे देशों में खेती के लिए ढूंढ रहा जमीन

(न्यूज़)।इन दिनों चीन बड़े खाद्य संकट के दौर से गुजर रहा है. अर्थशास्त्रियों के मुताबिक बीते कुछ वर्षों में चीन लगातार दुनिया भर के कई देशों के साथ किए गए खाद्यान्न सौदों को रद्द कर रहा है. अधिकांश सौदों में बड़े पैमाने पर खाद्य पदार्थों का आदान-प्रदान शामिल है. चीन ने बाकायदा इन सौदों के लिए एग्रीमेंट किये थे लेकिन अब चीन इन सौदों को रद्द कर रहा है, इससे माना जा रहा है कि चीन एक बड़े खाद्य संकट से गुजर रहा है. वहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बॉर्डर पर तनाव के जरिए लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं.
इस साल जुलाई में चीन की खाद्य मुद्रास्फीति 13.2% बढ़ी है. एक आम चीनी द्वारा आमतौर पर उपभोग किए जाने वाले अधिकांश खाद्य उत्पादों की कम हुई है. इनमें अनाज से लेकर मीट तक शामिल है. राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरोब्ने खुलासा किया है कि सबसे अधिक खपत वाले मांस, पोर्क की कीमतों में 86% तक की वृद्धि हुई है. चीन दुनिया भर से खाद्य उत्पादों के आयात का सहारा ले रहा है. हालत यह है कि चीन को लगभग सभी प्रमुख खाद्य पदार्थों का आयात करना पड़ रहा है.
चीन के सीमा शुल्क विभाग के अनुसार, देश ने इस वर्ष की पहली छमाही के दौरान अपने अनाज के आयात में 22.7% की वृद्धि की है. जिससे खाद्यान्न आयात में 74.51 मिलियन टन की वृद्धि हुई है. हालांकि चीन पिछले कुछ वर्षों से सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादक रहा है फिर भी वह अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी यूएसए से इस साल 40 मिलियन टन सोयाबीन आयात करने की योजना बना रहा है.
चीन में फसलें इतनी कम हो गई हैं कि चीन के सरकारी स्टेट ग्रेन रिजर्व सिस्टम के तहत जून-जुलाई में केवल 45 मिलियन टन गेहूं ही खरीद सकता है. जो पिछले वर्ष की तुलना में 17.2% कम है. पर्यवेक्षकों का मानना है कि कम फसल के चलते किसान खाद्य पदार्थों का भंडारण भी कर रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह खाद्य संकट है, वह आशंकाओं से घिरे हुए हैं जिसके चलते सरकार को माल नहीं बेच रहे हैं. कहा जा रहा है कि चीनी सरकार नागरिकों पर दबाव डाल रही है कि वे सरकार के साथ अपने खाद्यान्नों का भंडारण करें ताकि संदेश जाए कि कोई खाद्यान्न संकट नहीं है।