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बॉम्‍बे हाईकोर्ट से आज भी रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्‍वामी को नहीं मिली राहत, सुनवाई टली, जाने वजह
November 6, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

मुंबई,  रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी को इंटीरियर डिजाइनर को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट से कोई तात्‍कालिक राहत नहीं मिली है। अर्नब गोस्वामी की जमानत याचिका अपूर्ण होने के चलते अदालत शुक्रवार को इस पर सुनवाई नहीं कर सकी। जमानत अर्जी पर कल यानी शनिवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। गोस्‍वामी ने अपनी गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है। 

न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और न्यायमूर्ति एमएस कर्णिक की खंडपीठ इस मामले पर शनिवार को सुनवाई करेगी। मालूम हो कि आर्किटेक्ट एवं इंटिरियर डिजाइनर अन्वय नाइक को कथित रूप से आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में गोस्वामी को लोअर परेल स्थित उनके घर से बुधवार को गिरफ्तार किया गया था। अर्नब ने बॉम्‍बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर के अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की अपील की है। 

गिरफ्तारी के बाद अलीबाग की एक अदालत ने इस मामले में गोस्वामी और दो अन्य आरोपियों को 18 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। फि‍लहाल गोस्वामी को एक स्थानीय स्कूल में रखा गया है। इस स्‍कूल को अलीबाग कारागार का कोविड सेंटर बनाया गया था। गोस्वामी ने अपनी याचिका में गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए उसका गैरकानूनी बताया है। यही नहीं उन्‍होंने अदालत से मामले की जांच पर तुंरत रोक लगाने की भी गुहार लगाई है। 

समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस एसएस शिंदे और एमएस कर्णिक की खंडपीठ ने शुक्रवार को वरिष्‍ठ अधिवक्‍त हरीश साल्‍वे और अबद पोंडा (Aabad Ponda) की दलीलें सुनी। पीठ ने कहा कि हम इस मामले पर कल भी सुनवाई जारी रखेंगे। याचिका में कहा गया है कि यह अर्नब और उनके चैनल की राजनीतिक रूप से छवि खराब करने और सियासी प्रतिशोध का मामला है। याचिकाकर्ता को झूठे और बंद किए जा चुके मामले में गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया है। 

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब गोस्वामी को पत्र लिखने के मामले में महाराष्ट्र विधानसभा के सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनसे दो हफ्ते में यह बताने को कहा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। विधानसभा सचिव ने अर्नब को कथित तौर पर सदन के नोटिस की जानकारी शीर्ष अदालत को नहीं देने के लिए कहा था। सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र विधानसभा के विशेषाधिकार के उल्लंघन मामले में अर्नब को गिरफ्तारी से राहत दे दी है।