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भूस्वामी दहशत में भू माफियाओं के हौसले बुलंद 
September 10, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश


 
भाजपा के कुछ अपने ही पार्टी के लिए बने हैं मुसीबत

फतेहपुर।प्रदेश में फ़ैली महामारी से योगी सरकार जहां लड़ रहीं है वही                  फतेहपुर जनपद में भूस्वामी अपनी जमीन बचाने को लेकर संघर्ष कर रहे है एक के बाद एक हुई घटनाओं से बेशकीमती जमीनों के भूस्वामी न केवल सहमे डरे हुए है ब्लकि लगातार अपनी जमीनों को बचाने के लिए संघर्ष भी कर रहै है लेकिन दर्ज होने वाले फर्जी मुकदमों के आगे इन्हें भू माफियाओं के आगे घुटने टेकने को मजबूर होना पड़ रहा हैं। यहां के माहौल को देख कर ऐसा लगने लगा है कि सत्ता के ही नुमाइंदे अपनी पार्टी की क़ब्र खोदने में लगे हैं
फतेहपुर शहर हो या फिर कस्बा यहां की बेशकीमती जमीनों के ऊपर काले बादल लगातार मंडरा रहे हैं अब तो भू माफियाओं ने जमीनों को हथियाने के लिए एक नायाब तरीका ढूंढ लिया है पहले असलहों का प्रदर्शन करो। इसमे भू स्वामी यदि ना माने तो फिर पुलिस से मिलकर इनके विरुद्ध संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराओ ।मुकदमा दर्ज होने के बाद भूस्वामी को हर हाल में सिलेंडर होना ही है। हम यहा कुछ घटनाओं का उल्लेख करना चाहेंगे। छोटी-छोटी घटनाएं तो कई हुई लेकिन कुछ ऐसी घटनाएं हुई जो भाजपा की छवि को तार-तार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। शहर के पटेल नगर चौराहे के पास बने हनुमान मंदिर के पीछे जमीन पर कब्जे को लेकर पहले कुछ लोगों को थाने में बैठाया गया फिर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। यह वही लोग थे,जिन्होंने जमीन में अपना दावा कर रखा था ।जब दावेदार ही जेल चले गए तो जमीन पर कब्जा कर लिया गया लेकिन सत्ता के दो नुमाइंदों के आपस में ही भिड़ जाने के बाद जमीन की जो स्थिति थी वैसी ही है।फिर भी जमीन के दावेदार तो बेचारे जेल की हवा खा ली।
ऐसा नहीं है कि सत्ताधारी नेताओं की ही पकड़ प्रशासन में है विपक्ष भी कुछ कम नहीं है पत्थर कटा चौराहे के पास जमीन के कब्जे को लेकर जो तांडव हुआ उसे लेकर राजस्व विभाग से लेकर पुलिस विभाग की जमकर छीछालेदर हुई। lock डाउन के बाद भी पूरी रात कब्जे की कार्रवाई होती रही। कोरोना वायरस की महामारी को लेकर जारी गाइडलाइंस का जमकर मखौल उड़ाया गया lऐसा ही कुछ शहर में ही घोसियाना इलाके में हुआ यहां तो जमीन के कब्जे में असलहों का जमकर प्रदर्शन हुआ राजस्व विभाग से लेकर पुलिस विभाग के दर्जनों कर्मचारी मौजूद थे। इस क़ब्ज़े की अगुवाई भले ही गैर भाजपाई कर रहे हो लेकिन कहीं न कहीं कब्जे के पीछे सत्ता का हाथ माना गया।
जमीनों को हथियाने का जो एपिसोड चालू हुआ वह बंद होने का नाम ही नहीं ले रहा। एक नए मामले में भूस्वामी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया फिर उसी की ही जमीन हथियाई गई।  यह भी मामला काफी सुर्खियों में है। जमीन जोनिहा चौराहा के पास की है कुछ हिस्सा पत्थर कटा चौराहे के पास भी है।
छोटी-छोटी घटनाओं की चर्चा करें तो उसमें सी पीएस स्कूल के पास की जमीनी हो या फिर तालाबी नंबर सभी में कही ना कहीं भू माफियाओं का रुतबा दिखाई देता है।
जमीनों में अवैध रूप से कब्जा करने का मामला कोई नई बात नहीं है सरकारे चाहे जिसकी हो भू माफिया वही  रहते हैं केवल दल बदल जाते हैं फिर भी सवाल सत्ताधारी ऐसे नेताओं से हैं जो ईमानदार छवि वाले मुख्यमंत्री को बदनाम करने में जुटे हैं।