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भारत के बड़े पैरोकार रहे हैं जो बाइडन, रिश्‍तों को मजबूत करने की अमेरिकी कोशिश का किया समर्थन
November 8, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

नई दिल्ली। रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चार वर्षों के कार्यकाल में निश्चित तौर पर भारत व अमेरिका के द्विपक्षीय रिश्तों ने काफी ऊंची छलांग लगाई है लेकिन अमेरिका के अगले राष्ट्रपति जो बाइडन भी हमेशा से दोनो लोकतांत्रिक देशों के बीच बेहद मजबूत संबंधों के समर्थक रहे हैं। यह समर्थन उन्होंने सिर्फ भाषणों में नहीं व्यक्त किया है बल्कि अपने चार दशकों के राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई बार भारत के साथ रिश्तों को मजबूत करने की अमेरिकी कोशिश को आगे बढ़ कर समर्थन किया है। 

भारत-अमेरिका न्यूक्लियर समझौते व भारत को रक्षा साझेदार बनाने में अहम रही है बाइडन की भूमिका

पूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश के कार्यकाल में भारत-अमेरिकी न्यूक्लियर डील को अंजाम तक पहुंचाने की बात हो या फिर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में भारत को 'प्रमुख रक्षा साझीदार' बनाने की प्रक्रिया हो, बाइडन का समर्थन हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। यही वजह है कि विदेश मंत्रालय इस बात को लेकर मुतमईन है कि ट्रंप के बेहद सकारात्मक भारत नीति की प्रक्रिया बाइडन के कार्यकाल में और तेज होगी।

सूत्रों के मुताबिक, बतौर सीनेटर (वर्ष 1973-2008) और उसके बाद बतौर उप-राष्ट्रपति (वर्ष 2009-16) बाइडन ने कम से कम छह ऐसे विधेयकों को समर्थन दिया है जिसका मकसद भारत को फायदा पहुंचाना रहा है। वर्ष 2001 में विदेश मामलों में सीनेट के चेयरमैन के तौर पर उन्होंने राष्ट्रपति बुश को पत्र लिखा था कि भारत पर लगे प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से हटाये जाने चाहिए। इसी पद पर रहते हुए उन्होंने भारत-अमेरिका के बीच किये गये सिविल न्यूक्लियर समझौते के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस समझौते को मंजूरी मिलने के बाद वर्ष 2008 के शुरुआत में उन्होंने सीनेटर चक हीगल और सीनेटर जॉन केरी के साथ भारत की यात्रा की। 

आतंकवाद के खिलाफ उन्होंने दूसरे सांसदों के साथ मिलकर कई प्रस्ताव पारित करवाये जिससे आतंकवाद को प्रश्रय देने वाले देशों को आर्थिक मदद पर रोक लगाई जा सकी थी। उन्होंने पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद को पाक सेना से अलग करने और सीधे लोकतांत्रिक एजेंसियों को देने संबंधी विधेयक को पारित कराने में मदद भी की थी। इसे भी भारत के हितों के मुताबिक ही माना जाना चाहिए।वर्ष 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद अमेरिका व भारत के रिश्तों में जो गुणात्मक वृद्धि हुई उसे भी बतौर उपराष्ट्रपति बाइडन ने पूरा समर्थन किया था।

वर्ष 2008 बतौर सीनेटर व वर्ष 2013 में उपराष्ट्रपति के तौर पर किया था भारत का आधिकारिक दौरा

वर्ष 2010 में राष्ट्रपति ओबामा की सफल भारत यात्रा के बाद वर्ष 2013 में बाइडन स्वयं भारत आये थे। उनकी राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी से मुलाकात हुई थी और तब वह दिल्ली स्थित गांधी स्मृति म्यूजियम गये थे। बाद में मुंबई में स्टॉक एक्सचेंज में एक यादगार भाषण भी दिया था। पीएम मोदी जब पहली बार 2014 में अमेरिका की यात्रा पर गये थे तब बाइडन ने उनके स्वागत में रात्रि भोज की आगवानी की थी। इसके बाद पीएम ने अपनी दूसरी यात्रा (वर्ष 2016) में अमेरिका की संयुक्त संसद को जब संबोधित किया था, तब इसके लिए आयोजित विशेष सत्र की बाइडन ने संयुक्त अध्यक्षता की थी। 

इसके बाद ही ओबामा-बाइडन प्रशासन ने भारत को प्रमुख रक्षा साझेदार घोषित किया था। इस घोषणा के बाद अमेरिका ने भारत को अपना सबसे करीबी रक्षा व रणनीतिक साझेदार बनाया। इसके तहत अभी तक रक्षा क्षेत्र में पांच अहम समझौते हो चुके हैं। अंतिम समझौता (बीका) दो हफ्ते पहले ही नई दिल्ली में हुआ है।भारत के साथ अपने बेहद पुराने राजनीतिक रिश्तों की वजह से ही 15 अगस्त, 2020 को जब उन्होंने भारतीय समुदाय के एक समूह को संबोधित किया तो यह कहा कि भारत जिन भी चुनौतियों का सामना कर रहा है, वह चुनाव जीतने के बाद उसे दूर करने में मदद करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दोनो देशों के करीब आने से दुनिया को ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकेगा।