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बलिया के पत्रकार को भावभीनी श्रद्धांजलि
August 25, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

 

फतेहपुर ।बलिया में एक पत्रकार  फिर गोली का शिकार हो गया। इससे पहले गाजियाबाद में सरेआम कुछ हत्यारों ने पत्रकार की गोली मारकर हत्या कर दी थी। योगी सरकार ने पत्रकारों पर हो रहे लगातार हमलों से पत्रकारों पर आ सुरक्षा के बादल मंडराने लगे हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा पत्रकारों के प्रति जो बर्ताव किया जाता वह निश्चित ही चिंता को बढ़ाता है।
             *बलिया जनपद* में 24 अगस्त की शाम सहारा समय न्यूज़ चैनल के पत्रकार रतन सिंह की हत्यारों ने गोली मारकर हत्या कर दी। एक पत्रकार की हत्या नहीं हुई बल्कि चौथे स्तंभ की हत्या की गई है। निर्भीक निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों के बीच अब सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। जिस तरह से पत्रकारों पर हमले हुए हैं और एक के बाद एक पत्रकारों को मौत के घाट उतारा जा रहा है,उससे योगी सरकार पर प्रश्नचिन्ह तो लग ही रहे हैं जिला प्रशासन पर भी प्रश्न उठने लगे हैं अखिल जिला प्रशासन पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर क्यों नहीं है। पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही।
         *पत्रकार हमेशा* जान जोखिम में डालकर पत्रकारिता करता है यूं कहें कि जरूरतमंद पीड़ित और सताए हुए लोगों की आवाज बनता है। इतना ही नहीं भू माफिया हो या फिर खनन माफियाओं द्वारा सरकार को  करोड़ों रुपए कि लगने वाली चपत को उजागर करता है। इसमें उसका अपना कोई ना तो स्वार्थ होता है और ना ही लालच लेकिन इस काम में जुड़े लोग उसके दुश्मन जरूर बन जाते हैं। कई बार तो स्थानीय पुलिस भी पत्रकारों की दुश्मन बन जाती है। क्योंकि पुलिस की गलत सही हरकतों को उजागर कर उनकी करतूतों को समाज के सामने पत्रकार रख देता है।  पत्रकार समाज के माफियाओं और स्थानीय स्तर पर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी लेने वाले थाने की पुलिस के बीच हमेशा पिस्ता नजर आता है।
होने वाले हमलों से पत्रकार डरा तो जरूर है लेकिन उसके हौसले अभी भी बुलंद है। एक घटना हो या फिर दर्जनों घटनाओं में पत्रकारों को कुर्बानियां देनी पड़े फ़िर भी पत्रकारिता निष्पक्ष और निर्भीक तरीके से की जाएगी और आगे भी जारी रहेगी। हम अपने साथी बलिया के पत्रकार रतन सिंह की कुर्बानी को याद रखेंगे। फतेहपुर प्रेस क्लब पत्रकार की हुई हत्या को लेकर दुःख प्रकट करता है और इस दुःख की घड़ी में परिवार वालों के साथ है। फतेहपुर प्रेस क्लब इस बात की मांग करता है कि 50 लाख रुपए सरकार द्वारा आर्थिक सहायता के साथ एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर एक ठोस रणनीति सरकार द्वारा बनाई जाए। जिससे पत्रकारों को होने वाले जानलेवा हमलों में अपनी जान न गवानी पड़े।