ALL राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश राज्य राजनीति अपराध विशेष विज्ञापन दुनिया कोविड-19 (कोरोना वायरस)
बाहरी जनप्रतिनिधियों की वजह हैं फतेहपुर का पिछडापन या कुछ और
August 7, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

 

बिंदकी फतेहपुर।

मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे फतेहपुर जिले के लोग अभी तक पिछड़ेपन का दाग छुटा नहीं पाए हैं। 70 साल के विकास कार्यों को मौजूदा सरकार ने नकार रखा है। भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी रहीं पूर्वर्ती सरकारों को निकम्मा जैसी श्रेणी में खड़ा कर रखा है। केंद्र व प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद भले ही लोगों में विकास की आस जगी हो लेकिन भ्रष्टाचार सहित विकास के पिछड़ेपन का दंश लोग अभी भी झेल रहे हैं। धर्म व राष्ट्रवाद की घुट्टी से मौजूदा सरकार विकास का सपना दिखा रही है। अयोध्या में भगवान श्री राम के बहुप्रतीक्षित मंदिर के शिलान्यास के बाद रामराज की कल्पना की जा रही है। शायद यह हकीकत से परे है। रही विपक्ष की बात तो कारण कोई भी हो लेकिन विपक्ष असहाय स्थिति में है।
      जनपद की 29 लाख से अधिक की आबादी में ज्यादातर लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे हैं। जिला मुख्यालय सहित *कस्बाई इलाके भी लोगों को गांव जैसा एहसास ही करा रहे हैं। आज भी बिजली-सड़क-पानी, सिंचाई, स्वास्थ, शिक्षा सहित भ्रष्टाचार व कानून व्यवस्था के मामलों से आमजन जूझ रहा है। नेता विकास की डींगे हांक रहे हैं!लेकिन जमीनी हकीकत इससे दूर है। प्रदेश में चाहे कांग्रेस का शासन काल रहा हो सपा का या फिर बसपा शासनकाल रहा हो। गठबंधन की सरकारों तक ने जिले का भला नहीं किया। जनप्रतिनिधि इसके लिए निश्चित तौर पर जिम्मेदार हैं। खासकर परदेसी नेता। परदेसी नेता जिले के लोगों की भावनाओं से खेलते रहे। परदेसी सपा, बसपा, कांग्रेस एवं भाजपा को भी भाए और जिले के लोगों को भी! जनपद वासियों ने उन्हें सिर आंखों पर बिठाया और अपनी दुर्दशा की बुनियाद को चुनाव दर चुनाव मजबूत करते रहे।स्वतंत्रता के बाद से जिले के सांसद ज्यादातर परदेसी ही रहे एक या दो मौके ही ऐसे रहे जब संसद में जिले का प्रतिनिधित्व करने के लिए स्थानीय लोगों को मौका मिला। यह वह दौर था जब विकास की दौड़ में पूरा देश ही दूसरे विकासशील देशों के साथ चलने की होड़ में था और समानांतर चलने का प्रयास कर रहा था। 
     परदेसी जनप्रतिनिधियों ने जिले के विकास को कभी तवज्जो ही नहीं दिया। भाषण बाजी व बयान बाजी में तो सपने दिखाए गए लेकिन भावनात्मक तरीके से जुड़ाव ना होने के चलते जनपद के लोगों की पीड़ा को जनप्रतिनिधि नजदीक से महसूस ही नहीं कर सके। दिखावे के लिए उनके आवास यहां बने लेकिन समय के साथ वह आवास भी समाप्त हो गए और चुनाव हारने के साथ ही सांसद विधायकों ने जिले की ओर कभी मुड़ कर नहीं देखा।कभी प्रदेश व केंद्र में गठबंधन सरकारों ने जिले के विकास में रोड़ा लगाया तो कभी जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से यहां की स्थिति जस की तस रही। जब केंद्र व प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी तो लोगों को आस जगी कि शायद अब उनके दिन बहुरंगे। लेकिन "अच्छे दिन अभी आने को है"?केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटा कर ऐतिहासिक काम किया। इसकी प्रशंसा की जानी चाहिए।इसके साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर का शिलान्यास भी करोड़ों करोड़ हिंदुओं का सपना साकार करने वाला है। लेकिन देश की गिरती अर्थव्यवस्था, महंगाई, बेरोजगारी, प्रदेश में कानून व्यवस्था की बिगड़ी स्थिति से लोग परेशान हैं। युवाओं को काम नहीं मिल रहा है। सरकार को इन समस्याओं के निराकरण का हल सोचना होगा।
     केवल "शाइनिंग इंडिया" "राइजिंग इंडिया" की बात करके देश को विकास की राह पर नहीं ले जाया जा सकता।जनप्रतिनिधियों को जिले के विकास को लेकर ठोस कदम उठाने होंगे। तभी पिछड़ेपन के दर्द को खत्म किया जा सकेगा। आज भारत सरकार की रेटिंग के पिछड़े जिलों में फतेहपुर जिला भी शामिल है। यहां केवल बतोलेबाजी से विकास नहीं हो सकता।इसके लिए सार्थक प्रयास करने होंगे। अभी भी जिला मुख्यालय के लोग सीवर लाइन व जल निकासी जैसी समस्याओं से परेशान हैं। डेढ़ वर्ष पहले तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा चलाए गए अवैध अतिक्रमण अभियान के बाद शहर की तस्वीर बदल गई। खंडहर जैसे नजारे दिखने लगे और अतिक्रमण के बाद विकास का केवल सपना दिखाया गया। जनप्रतिनिधि लोगों की बर्बादी का मंजर चुपचाप देखते रहे और अब हकीकत सबके सामने है। इस तरह से भाजपा सरकार में विकास, भ्रष्टाचार, बिगड़ी कानून व्यवस्था की कल्पना तो आमजन ने नहीं की थी। रही बात कांग्रेस,सपा व बसपा की तो ये मानो अपना वजूद ही भूल गए हैं। एक दूसरे के ऊपर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। विकास का दम भरा जा रहा है लेकिन उन्हें कौन बताए की पूर्ववर्ती सरकारों व मौजूदा सरकार में अगर विकास हुआ होता तो लोगों की आज यह स्थिति ना होती। 
    सरकारों को यह सोचना होगा कि हमारी आस्था के केंद्र पूरे देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में विराजमान देवी देवता करोड़ो की संपत्तियों के स्वामी हैं उस क्षेत्र का विकास हुआ लेकिन देश के विकास में मंदिरों का योगदान कितना रहा यह बताने की जरूरत नहीं है। पर्यटक व श्रद्धालु वहां पहुंचते रहे आर्थिक समृद्धि होती रही। संबंधित क्षेत्र का विकास भी हुआ पर क्या दूसरों का भला हो सका? बिना धर्म व आस्था के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती  लेकिन केवल जय श्रीराम व वंदेमातरम बोलने, पाक व चाइना को कोसने से ना यहां के 135 करोड़ लोगों का भला होने वाला है और ना ही देश का। इसके लिए सभी को सजग होना होगा।अपने-अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करना होगा और नव-भारत के निर्माण के लिए आगे बढ़ सभी को अपना योगदान देना होगा! तभी मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान "श्रीराम" के आदर्शों एवं "रामराज" का सपना साकार हो सकेगा। देश के निर्माण व नए युग की शुरुआत के लिए सभी दलों को आपसी कटुता, स्वार्थपरक राजनीति से तौबा कर देश को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट होना होगा। जब हम सब एक हो आगे बढ़ेंगे! तभी देश आगे बढ़ेगा।