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अतिक्रमणकारियों की शिकार हुई ससुर खदेरी नदी के प्रेमियों के बीच जागी उम्मीद 
June 29, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश


 
जिलाधिकारी का साथ देना होगा जनप्रतिनिधियों को ! 

देश हो प्रदेशों हो या फिर अपना जिला वहां की प्राकृतिक धरोहर उस जगह की शान हुआ करती हैं जैसे पवित्र नदी गंगा यमुना के बीच बसे होने का गौरव इस जनपद को प्राप्त है वैसे ही जनपद से निकलने वाली छोटी छोटी नदियों ने भी इस जनपद की शान को बढ़ाने का काम किया है ।लेकीन इन्ही में से कुछ नदियां अब अपने अस्तित्व को बचाने को लेकर संघर्ष कर रही हैं। ऐसी ही एक नदी खागा तहसील क्षेत्र के हथगाम विकासखंड की है जिसे हम ससुर खदेरी नदी के नाम से जानते हैं जिसके बारे में कल हम आपसे बात कर चुके है लेकिन आज हमें इस नदी के बारे में कुछ और बातें करने का मन हो रहा है।
हथगाम कस्बे के ठीक पास सेमरा मानापुर गांव है जहां से ससुर खदेरी नदी का जन्म हुआ,जन्म कैसे हुआ और इसका नाम कैसे पड़ा इसकी चर्चा भी कल हो चुकी है। लेकिन जिला अधिकारी संजीव सिंह द्वारा की जाने वाली पहल के बाद ससुर खदेरी नदी का नाम फिर सुर्खियों में आने लगा है ।लोगों को जीवन देने वाली नदी आज खुद अपनी जिंदगी के लिए जद्दोजहद कर रही है। करीब 50 से60 साल पहले यह नदी एक विशाल  रूप हुआ करत थी ।लेकिन जिन लोगों को इस नदी ने जिंदगी दी शुद्ध वातावरण दिया आज उन्हीं लोगों ने नदी का अतिक्रमण कर इसके स्वरूप को ही बिगाड़ कर रख दिया जो अब एक नाले के रूप में परिवर्तित हो गई। ससुर खदेरी नदी का जिस जगन्नाथ धाम में जन्म हुआ वह  सैकड़ों बीघे से अधिक की झील हुआ करती थी। लेकिन जब अतिक्रमणकारियों की नियति ही इस नदी के अस्तित्व को समाप्त करने की हो तो नदी का नाले के रूप में परिवर्तित होना आम बात हो जाती है।मजे की बात यह रही की नदी के बिगड़ते स्वरूप की ओर ना तो राजनैतिक लोगों की निगाह पहुंची और ना ही जिला प्रशासन की यदि राजनीतिक व प्रशासनिक अधिकारियों की मंशा ठीक होती तो निश्चित था कि नदी में हो रहे अतिक्रमण को बचाया जा सकता था और इसके असली स्वरूप को बिगड़ने से रोका जा सकता था ।लेकिन ऐसा नहीं हुआ कहीं ना कहीं जिला प्रशासन के साथ-साथ राजनीतिक लोगों ने जाने व अनजाने में भूल की या फिर अतिक्रमणकारियों का साथ दिया। 50-60 सालों में कई जनप्रतिनिधि हुए लेकिन अब तक धार्मिक मान्यताओं को संजोए इस नदी की किसी ने सुध नहीं ली।
जिलाधिकारी श्री सिंह ने जो पहल की है वह निश्चित ही एक सराहनीय कदम है।इस कदम को और अधिक तेजी से बढ़ाया जा सकता है जब राजनीतिक लोगों का साथ मिल जाए।जिलाधिकारी ने संबंधित विभाग को पूरी कार्ययोजना बनाए जाने के  दिए गए निर्देश के बाद हथगाम कस्बे व आसपास गांव के पर्यावरण प्रेमियों के बीच एक उम्मीद जागी है और इन लोगों का कहना है कि क्षेत्र के तमाम लोग जिला अधिकारी का साथ देंगे। ससुर खदेरी नदी के पुनः जिंदा होने से न केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान बढ़ेगा बल्कि क्षेत्र को इस नदी के पानी से हरा भरा किया जा सकेगा। जनपद के लोग जिला अधिकारी के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की ओर एक उम्मीद भरी निगाहों से देखना शुरू कर दिया है।आज सवाल सभी जनप्रतिनिधियों से है जो 50 से 60 वर्ष के बीच इस क्षेत्र का नेतृत्व कर चुके हैं फिर भी अब तक इस नदी को जीवित करने के लिए कोई भी ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया ।अब भी समय है उठो और जागो प्राकृतिक धरोहरों को बचाओ।