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अन्ना गौवंश की बद्हाली और किसानों की फसलों के लिए आखिर कौन जिम्मेदार*
August 25, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

बिंदकी फतेहपुर, 
जनपद ने अन्ना घूम रहे गोवंश का हाल बा से बदतर है। भूख और प्यास से ग्रसित यह गोवंश गौ सेवकों की ओर कातर निगाहों से निहार रहा है फिर भी इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। इतना जरूर है कि प्रदेश ने इन गोवंश को लेकर गौ सेवकों द्वारा सिर्फ राजनीति किया जाना ही दृष्टिगोचर हो रहा है। फतेहपुर जनपद ही नहीं पूरे प्रदेश में अन्ना गोवंशों का यही हाल है। इन बेचारे मुंह पशुओं की आवाज कोई भी सुनने को तैयार नहीं है ।कहने के नाम पर प्रदेश में तमाम गौशाला खोली गई हैं लेकिन गौशाला  संचालकों द्वारा भी अनदेखी की जा रही है। 80% से ज्यादा गोवंश बदहाली का शिकार हैं ।जब तक पशुपालकों पर लगाम नहीं लगाई जाएगी और पशुओं की टैगिंग नहीं होगी तब तक लोग इन्हें ऐसे ही अन्ना छोड़ते रहेंगे। शासन और प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है कि जब तक पशुपालकों को इनका लाभ मिलता है। तब तक तो वह इन्हें पालते हैं और जब लाभ मिलना बंद हो जाता है तो इन्हें इनके हाल पर छोड़ देते हैं ।जब तक इन मूक पशुओं के लिए कोई कड़ा कानून नहीं बनेगा। तब तक पशुपालक इन्हें अन्ना छोड़ते रहेंगे और यह गोवंश भूख और प्यास से इधर-उधर घूमता रहेगा। इन आवारा गोवंश के साथ केवल चारा पानी की समस्या नहीं है बल्कि किसानों द्वारा प्रताड़ित किया जाना भी शामिल है ।किसान भी क्या करें। यह आवारा  गोवंश जब उनकी फसलों को झुंड के रूप में जाकर नष्ट कर देते हैं और  चर जाते हैं तो उनके सामने भी अन्य का संकट पैदा होता है। इसी मजबूरी में वह इन पशुओं के साथ क्रूरता का व्यवहार करते हैं ।सरकार को इन आवारा गोवंश के लिए समय रहते इनके पालन की व्यवस्था नहीं की जाती है ।तो इसी तरह इन गोवंश का यही हाल रहेगा। फतेहपुर जनपद ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में अन्ना गोवंश की वजह से दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। अगर दुर्घटनाओं पर गौर किया जाए तो 10 प्रतिशत दुर्घटनाएं इन आवारा गौवंश की वजह से ही होती हैं।