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अनलॉक छूट नहीं समझदारी की परीक्षा, इन बातों का रखें विशेष ध्यान
September 25, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

कोरोना वायरस के खिलाफ अभी तक न तो कोई दवा है और न ही वैक्सीन। चूंकि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिहाज से अनलॉक घोषित किए जा रहे हैं। फिलहाल जारी अनलॉक 4.0 में सड़क, बाजार, कार्यालय हर जगह भीड़ ही भीड़ दिख रही है। शारीरिक दूरी के नियम का पालन तो दूर कई लोग मास्क तक नहीं पहन रहे, जो पहनते भी हैं, उनमें से 50 फीसद के नाक या मुंह खुले रहते हैं।

लोगों की इस लापरवाही ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में संक्रमितों की संख्या में हुई रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी ने डॉक्टरों की आशंका को सच साबित कर दिया है। अनलॉक में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लोग क्या सावधानी बरतें, बता रहे हैं एम्स, पटना के निदेशक डॉ. प्रभात कुमार सिंह और कोरोना नोडल पदाधिकारी डॉ. संजीव कुमार...

लापरवाही पड़ेगी भारी: कोरोना के वायरस सॉर्स कोव-2 को जिंदा रहने के लिए वाहक यानी हमारे शरीर की जरूरत होती है। इस वायरस को पूरी तरह नष्ट करने के लिए जब तक हम अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक सभी सरकारी उपाय नाकाफी होंगे। सरकार अपने स्तर से टेस्टिंग (संक्रमितों की पहचान), ट्रेसिंग (संक्रिमतों के सीधे संपर्क में आए लोगों की जांच) और ट्रीटमेंट (इलाज) में निरंतर प्रयास कर रही है, लेकिन आमजन का सहयोग नहीं मिलने से संक्रमितों की संख्या में तेजी आ रही है।

 

इसका कारण है कि अनलॉक होते ही लोगों ने लॉकडाउन में जिन सावधानियों को जीवनशैली में शामिल किया था, अब उनसे किनारा कर लिया है। अगर यही लापरवाही जारी रही तो आने वाला वक्त और भी घातक होगा। असल मायने में अनलॉक का अर्थ है, सावधानी बरतकर कोरोना संक्रमण को मात देते हुए देश की अर्थव्यवस्था को सुधार की ओर ले जाने का संकल्प। इसके लिए बहुत कुछ करने की जरूरत भी नहीं है। घर के बाहर मास्क पहनकर ही रहना है, कम से कम दो गज की दूरी बरकरार रखनी है और किसी भी अंजान सतह को छूने के बाद हाथों को धोना या सैनिटाइज करना है। भीड़भाड़ वाली जगहों या यात्रा से बचना ही उचित है।