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अगले साल से सरपट दौड़ेगी इकोनॉमी, RBI ने वित्त वर्ष 2021-22 में 10 प्रतिशत विकास दर का जताया अनुमान
October 10, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश

नई दिल्ली, वित्त वर्ष के छह महीने गुजर जाने के बाद रिजर्व बैंक ने विकास दर को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। शुक्रवार को मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए आरबीआइ गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास ने वर्ष 2020-21 के दौरान देश की इकोनोमी में 9.5 प्रतिशत की गिरावट होने का अनुमान लगाया है। हालांकि, अप्रैल, 2021 से शुरू होने वाले वित्त वर्ष में हालात तेजी से पलटने की उम्मीद जताते हुए उन्होंने 10.1 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर की बात कही है।

आरबीआइ का कहना है कि चालू वित्त वर्ष की शुरुआती तीनों तिमाहियों में विकास दर नकारात्मक रहेगी जो अंतिम तिमाही (जनवरी-मार्च, 2021) में 0.5 प्रतिशत रह सकती है। अप्रैल-जून, 2021 की तिमाही में विकास दर 20.6 प्रतिशत रहने की बात कही है, लेकिन यह स्थिति तब रहेगी जब कोविड काबू में आ जाए, घरेलू बाजार में मांग की स्थिति बेहतर हो और वैश्विक हालात भी सकारात्मक हो।नवगठित मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद शुक्रवार को इसके फैसलों की जानकारी देते हुए आरबीआइ गवर्नर ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करते हुए इसे चार प्रतिशत पर बरकरार रखा है। रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंक अल्पकालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए आरबीआइ से कर्ज लेते हैं। यह सस्ती होती है तो बैंकों के लिए होम, ऑटो और पर्सनल लोन जैसे सावधि खुदरा कर्ज की दरों को कम रखने में सहूलियत होती है। रेपो रेट की तरह रिवर्स रेपो रेट जैसी अन्य किसी भी वैधानिक दरों में बदलाव नहीं किया गया है।