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आपत्ति काल में भारतीय समाज को संबल प्रदान करने में अग्रणी रही हैं महिलाएं
June 26, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • उत्तर प्रदेश


 न्यूज आफ फतेहपुर
कानपुर,26 जून। 
वीएसएसडी कॉलेज के विधि विभाग द्वारा आज “महामारी के दौरान महिलाओं के विधिक और सामाजिक स्थिति पर प्रभाव” पर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में बोलते हुए उच्चतम न्यायालय की अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा  ने कहा कि भारतीय महिलाएं हमेशा से ही आपत्ति काल में भारतीय समाज को संबल प्रदान करने में अग्रणी रही हैं। कोविड महामारी के दौरान भारतीय महिलाएं विश्व की महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी हैं। लॉक डाउन की वजह से जब आवश्यक वस्तु और काम मिलना आसान नहीं था तब अपने घर परिवार और बच्चों के लिए घर में उपलब्ध सामग्री से ही नए नए तरह का व्यंजन बनाकर न सिर्फ अपने परिवार को मानसिक रूप से मजबूती प्रदान किया बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से अपनी अगली पीढ़ी को हर चुनौती का सामना करने की युक्ति भी सिखाये । इसके साथ ही सोशल मीडिया पर सौंदर्य प्रतियोगिता का आयोजन किया जाना , उसमें महिलाओं का भाग लेना ,महिलाओं के मानसिक मजबूती को दर्शाता है ।निराशा के वातावरण में भी अपने समाज ,परिवार और उन संस्थाओं में जहां  पर कार्यरत हैं , सभी जगह पर संतुलन बनाने का अद्भुत उदाहरण है। किचन में रखी काली मिर्च और गमले में लगी तुलसी से उसने महामारी का सामना करने का फैसला किया और इस ज्ञान पर उसका एकाधिकार है ।इसके साथ ही इस चुनौतीपूर्ण समय में कामकाजी महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारी आयी जिससे उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य  प्रभावित हुआ है ।रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की प्रोफेसर ममता राव ने अपने वक्तव्य में लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा और महिलाओं के स्वास्थ्य से सम्बंधित विषय पर अपना विचार रखते हुए बताया कि यद्यपि घरेलू हिंसा की कुछ शिकायतें हैं और इस महामारी के दौरान महिलाओं को घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ा है।इसके बावजूद बड़ी संख्या में पुरुषों के द्वारा अपनी  पत्नी के सहयोग की तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रकाशित किया जाना एक सामाजिक परिवर्तन का घोतक है । एक समय ऐसा था जब पुरुष के घरेलू काम करने पर उसका उपहास उड़ाया जाता था परंतु आज उस काम को कर वह सोशल मीडिया पर डाल रहा है , यह सामाजिक मूल्यों में परिवर्तन का घोतक है । इस प्रकार का परिवर्तन भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति को मजबूत करेगा । यद्यपि लॉकडाउन के दौरान महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा और उनके मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य पर  प्रभाव स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है ।जहां एक तरफ उसे अपने बच्चों की चिंता है ,वहीं दूसरी तरफ रोजगार की भी चिंता है । दोनों मोर्चों पर कार्य करते हुए महिलाओं की स्थिति प्रभावित हुई है । राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ स्कंद पाण्डे जी ने इस महामारी के दौरान महिलाओं के रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव और उनके ऊपर होने वाले हिंसा के संदर्भ में अपने विचार रखते हुए कहा कि महामारी के बाद महिलाओं का रोजगार पाने की स्थिति में परिवर्तन होगा । उनको कुछ कम वेतन पर काम करना पड़ेगा और हो सकता है कि महिलाओं को अब घर से काम करने की सुविधा कंपनियां आसानी से दे दे जिससे महिलाएं कम वेतन पर भी कार्य करने के लिए तैयार हो जाए । इससे संविधान के द्वारा दिया गया अधिकार प्रभावित होगा ।कॉलेज की सह सचिव नीतू सिंह जी ने कहा हर हर विपत्ति का सबसे पहला प्रभाव महिलाओं की स्थिति पर पड़ताकालेज की प्राचार्य डा छाया जैन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि महामारी के दौरान महिलाओं को काफी चुनौतीपूर्ण समय का सामना करना पडा है । अतिथियों का परिचय विभागाध्यक्ष डॉ आर के पाण्डेय  ने किया । कार्यक्रम का संचालन डॉं अजय भूपेंद्र जायसवाल और धन्यवाद ज्ञापन अमृता वर्मा के द्वारा किया गया । इस अवसर पर विभाग के सभी शिक्षक साथी और आइक्यूएसी की डायरेक्टर डॉ नीरू टंडन उपस्थित रहीं । कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग विभाग के शिक्षक प्रवीण शुक्ला ने किया।