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" न कोई सीमा में घुसा है, न कोई पोस्ट किसी के कब्जे में"- पीएम
June 20, 2020 • ब्यूरो रिपोर्ट - न्यूज ऑफ फतेहपुर • राष्ट्रीय

नई दिल्ली। भारत चीन सीमा विवाद को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों को स्पष्ट कर दिया है कि वहां न तो कोई हमारी सीमा में घुसा है और न ही कोई पोस्ट किसी के कब्जे में है। कांग्रेस, वाम जैसे विपक्षी दलों की ओर से उठे सवालों के बीच प्रधानमंत्री ने यह भी आश्वस्त किया है कि देश की सेना सक्षम भी है और सरकार की ओर से उन्हें यथोचित कार्रवाई की पूरी छूट भी दे दी गई है, कोई आंख उठाकर नहीं देख सकता है। जैसी अपेक्षा थी, सर्वदलीय बैठक में कुछ वैसा ही हुआ।

 

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से सवालों की झड़ी लगी। साथ ही सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि उसने सर्वदलीय बैठक बुलाने में देर कर दी। सेना पर पूरा भरोसा जताते हुए सरकार के साथ खड़ी होने के लिए यह शर्त भी रखी कि विपक्ष को हर बात की पूरी जानकारी दी जाए। इस रुख के बाद माना जा सकता है कि जिस तरह पिछले दिनों में कांग्रेस की ओर से सवाल उठते रहे हैं, वह बरकरार रह सकता है। लेकिन कांग्रेस से इतर वाम के अलावा दूसरे सभी विपक्षी दलों ने सरकार के निर्णय पर भरोसा जताया। 

ममता, मायावती, स्‍टालिन, पवार ने सरकार के फैसले का सराहा  

तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि 'संकट की इस घड़ी में हम सरकार के साथ हैं और हम जीतेंगे।' बसपा नेता मायावती ने प्रधानमंत्री के निर्णय के साथ खड़े होने की बात की। द्रमुक नेता एम के स्टालिन ने हाल में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए बयान का स्वागत किया। एनसीपी नेता व पूर्व रक्षा मंत्री शरद पवार ने जहां कुछ सुझाव दिए, वहीं परोक्ष रूप से कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अहसास कराया कि सीमा पर सैनिक हथियार के साथ जाते हैं या नहीं, अंतरराष्ट्रीय संधि से तय होते हैं। राजनीतिक दलों को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। 

पीएम बोले, भारत कभी किसी के दबाव में नहीं आया है और न आएगा

वहीं बिहार के मुख्यमंत्री व जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार, बीजद, टीआरएस जैसे दलों नें सरकार के साथ खड़े होने की बात की। लगभग ढाई घंटे चली वर्चुअल बैठक में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी शामिल थीं। दलों को पूरी घटना पर प्रजेंटेशन दिया गया था। कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में सख्त रुख का संकेत दिया था।

 

शुक्रवार को भी लगभग उसी अंदाज में प्रधानमंत्री ने कहा- चाहे ट्रेड हो, कनेक्टिविटी हो या काउंटर टेररिज्म हो, भारत कभी किसी के दबाव में नहीं आया है और न आएगा। देश की रक्षा के लिए जल-थल-नभ सभी जगहों पर हमारी सेनाएं पूरी तरह मुस्तैद हैं। भारत की सैन्य क्षमता ऐसी है कि हमारी जमीन पर कब्जे की बात तो दूर, उसकी ओर कोई आंख उठाकर भी नहीं देख सकता है।' 

हमारे सैनिकों के सवाल जवाब से बढ़ रहा है तनाव 

चीन के साथ लंबी सीमा और एक साथ पाकिस्तान की ओर से खतरे की आशंका की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि आज हमारी सेनाएं अलग-अलग सेक्टर्स में एक साथ मूव करने में सक्षम है और इसमें सीमावर्ती इलाकों में तैयार आधारभूत ढांचा काफी मददगार साबित हो रहा है। इससे चीन सीमा पर हम अब बेहतर निगरानी कर पा रहे हैं। पहले जिन इलाकों में चीनी फौज बेरोक-टोक घूमती थी, वहां अब हमारे सैनिक डगर-डगर पर सवाल-जवाब कर रहे हैं और इसीलिए तनाव बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने सभी दलों को सुझावों के लिए धन्यवाद देते हुए भरोसा दिलाया कि देश की संप्रभुता की रक्षा सर्वोपरि है और सेना सक्षम है। 

सोनिया गांधी ने पूछे कई सवाल

कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने पूछा, चीनी सेनाओं ने लद्दाख में हमारे क्षेत्र में किस तारीख को घुसपैठ की? सरकार को हमारे क्षेत्र में चीनी घुसपैठ के बारे में कब जानकारी हुई? खबरों की माने तो घुसपैठ पांच मई को हुई, क्या यह सही है, या फिर घुसपैठ उसके बाद हुई? क्या सरकार को, नियमित रूप से, हमारे देश की सीमाओं की सैटेलाइट इमेजेज नहीं मिलती हैं? क्या हमारी खुफिया एजेंसियों ने लाइन आफ एक्चुअल कंट्रोल पर घुसपैठ की जानकारी नहीं दी? क्या सेना की इंटेलीजेंस ने सरकार को एलएसी पर चीनी कब्जे और भारतीय क्षेत्र में चीनी सेना की मौजूदगी के बारे में सचेत नहीं किया? क्या सरकार यह स्वीकार करेगी कि यह इंटेलीजेंस फेल्योर है?